विभगीय परिचय

विभाग का इतिहास

भारत में प्रचलित विभिन्न प्रकार के बाट माप, तौलने-मापने के यंत्रों के स्थान पर एकरूपता लाने की दृष्टि से वर्ष 1956 में भारतीय संसद में मानक बाट माप अधिनियम बनाय गया, जिसके अनुपालन में उत्तर प्रदेश राज्य में भी मानक बाट माप (प्रवर्तन) अधिनियम-1959 एवं नियमावली 1960 प्रख्यापित की गयी । पाश्चात्य देशों मे प्रचलित डिब्बा बन्द वस्तु अधिनियम के अनुरूप भारत मे भी मानक बाट माप अधिनियम 1976 के अन्तर्गत डिब्बा बन्द वस्तु नियम 1977 बनाये गये । कालान्तर मे भारत सरकार द्वारा उपभोक्ता हित संरक्षण को और व्यापक एवं प्रभावी बनाये जाने की दृष्टि से मानक बाट माप (प्रवर्तन) अधिनियमित किया गया जो कि उ0प्र0 राज्य मे 26 जनवरी, 1990 से लागू किया गया । उक्त अधिनियम के अन्तर्गत उ0प्र0 बाट और माप मानक (प्रवर्तन) नियमावली-1990 प्रख्यापित की गयी । वर्तमान मे उपरोक्त के स्थान पर विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 तथा प्रदेश मे उ0प्र0 विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2011 प्रख्यापित की गयी है, जो दिनॉक 1 अप्रैल 2011 से प्रभावी है ।

विभाग का उद्देश्य

विभाग का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक लेन देन अथवा संरक्षण की दृष्टि से प्रयुक्त होने वाले बाट-माप, तौलने एवं मापने के यंत्रो की नियतकालिक अन्तराल पर जाँच करते हुए सत्यापन एवं मूद्रांकन करना, डिब्बा बन्द वस्तु के निर्माताओं पैकर्स का पंजीकरण करना तथा विधिक माप विज्ञान (पैकेज मे रखी वस्तुएँ) नियम 2011के उल्लंघन करने वाले व्यापारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही करना तथा विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 एवं उ0प्र0 विधिक माप विज्ञान(प्रवर्तन) नियमावली, 2011 के अन्तर्गत प्रवृत्त विधिक प्राविधानों का उल्लंघन यथा अमानक बाट माप तथा तौलने एवं मापने के उपकरणों का प्रयोग, कम तौलना एवं मापना आदि पाये जाने पर अधिनियम 2009 के अन्तर्गत अभियोजन का शमन एवं अशमनीय अभियोजन को न्यायालय मे निवेशित किया जाना आदि कार्य करना है ।

विभागीय संगठन

विधिक माप विज्ञान (बाट तथा माप) शाखा उपभोक्ता संरक्षण एवं बाट-माप विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण मे स्थापित है तथा इस् विभाग के विभागाध्यक्ष के पद पर प्रन्तीय सिविल सेवा संवर्ग के वरिष्ठतम अधिकारी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत है ।

नई व्यवस्था के अन्तर्गत शासन आदेश सं0 835/84-1-08- 02स्था0/2005 लखनऊ दिनांक 11 जून, 2008 के द्वारा सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश को तीन जोन मे विभाजित किया गया है तथा विभाग के कार्यरत तीन उप नियंत्रकों को क्षेत्रीय अधिकारी तैनात किया गया है । क्षेत्रीय अधिकारियों का मुख्यालय क्रमशः लखनऊ फैजाबद तथा मेरठ है । उक्त तीन क्षेत्रों मे लखनऊ, कानपुर, आगरा, झाँसी, मेरठ क्षेत्र के अन्तर्गत मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, तथा फैजाबाद के अन्तर्गत वाराणसी, आजमगढ़ इलाहाबाद एवं फैजाबाद सम्भाग को समायोजित किया गया है ।

विधिक माप विज्ञान मे कुल 148 निरीक्षक कार्यालय/कार्यमानक प्रयोग्शालाएं सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश मे स्थापित है । वर्तमान मे 12 मण्डलों मे विभागीय अधिकारी कार्यरत है । प्रत्येक क्षेत्रीय मुख्यालय के अतिरिक्त अन्य मण्डलो मे उपनियन्त्रक की सहायता के लिये आवश्यकतानुसार सहायक नियंत्रक वर्ग-1, सहायक नियंत्रक वर्ग-2 कार्यरत है । विधिक माप विज्ञान के कार्यमानक प्रयोगशाला/निरीक्षक इकाईयां वर्तमान मे 78 जनपद मुख्यालयों तथा 68 तहशील(मुख्यालयों)स्थापित हैं ।कार्यमानक प्रयोगशाला/निरीक्षक इकाइयों मे ज्येष्ठ निरीक्षक/निरीक्षक तथा उनकी सहायता के लिये लिपिक वर्ग एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत है । प्रत्येक सम्भागीय मुख्यालय मे उपनियंत्रक अथवा सहायक नियंत्रक द्वारा इन निरीक्षक कार्यलयों/कार्यमानक प्रयोगशालाओं के कार्यकलापों का समय-समय पर निरीक्षण करते हुए उनके कार्य का पर्यवेक्षण किया जाता है । सम्भागीय मुख्यालय में वर्तमान में 10 द्वितीय कार्यमानक प्रयोगशालाये स्थापित हैं ।